भारत की पारंपरिक जल-संरक्षण प्रणालियों का केंद्रीय विचार।
स्थानीय वर्षाजल संचयन की जरूरत और उसका संदर्भ।
वर्षा, मिट्टी, भू-आकृति और जल-आवश्यकता प्रणाली का चुनाव तय करते हैं।
हिमालय, राजस्थान और बंगाल में अलग-अलग जल-संचयन प्रणालियों का संबंध।
खड़ीन, जोहड़ और टांका एक ही राज्य में अलग जरूरतों के उत्तर हैं।
लगभग दो लाख लीटर क्षमता वाले भूमिगत जल-भंडार का उदाहरण।
स्थानीय जल-प्रबंधन के चार load-bearing विचारों का पुनरावलोकन।
टिकाऊ जल-प्रबंधन का सही उत्तर जगह की परिस्थितियों को समझता है।