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भारत की पारंपरिक वर्षाजल संचयन प्रणालियाँ

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वर्षाजल संचयन
0:00 - 0:12

भारत की पारंपरिक जल-संरक्षण प्रणालियों का केंद्रीय विचार।

बड़ी परियोजना हर जगह समाधान नहीं
0:12 - 0:43

स्थानीय वर्षाजल संचयन की जरूरत और उसका संदर्भ।

पहले स्थान को समझिए
0:43 - 1:14

वर्षा, मिट्टी, भू-आकृति और जल-आवश्यकता प्रणाली का चुनाव तय करते हैं।

भारत का स्थानीय मानचित्र
1:14 - 1:53

हिमालय, राजस्थान और बंगाल में अलग-अलग जल-संचयन प्रणालियों का संबंध।

राजस्थान के रूप
1:53 - 2:28

खड़ीन, जोहड़ और टांका एक ही राज्य में अलग जरूरतों के उत्तर हैं।

फलोदी का घरेलू टांका
2:28 - 3:04

लगभग दो लाख लीटर क्षमता वाले भूमिगत जल-भंडार का उदाहरण।

चार बातें साथ रखिए
3:04 - 3:38

स्थानीय जल-प्रबंधन के चार load-bearing विचारों का पुनरावलोकन।

अंतिम विचार
3:38 - 3:46

टिकाऊ जल-प्रबंधन का सही उत्तर जगह की परिस्थितियों को समझता है।